| श्री चैतन्य भागवत » खण्ड 2: मध्य-खण्ड » अध्याय 27: भगवान का वियोग भाव को शांत करना » श्लोक 23-24 |
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| | | | श्लोक 2.27.23-24  | কমল-নযন তোর শ্রী-চন্দ্র-বদন
অধর সুরঙ্গ, কুন্দ-মুকুতা-দশন
অমিযা বরিখে যেন সুন্দর বচন
না দেখি বাঙ্চিব কি সে গজেন্দ্র-গমন | कमल-नयन तोर श्री-चन्द्र-वदन
अधर सुरङ्ग, कुन्द-मुकुता-दशन
अमिया वरिखे येन सुन्दर वचन
ना देखि वाङ्चिब कि से गजेन्द्र-गमन | | | | | | अनुवाद | | "आपके कमल-नेत्र, चन्द्रमा-सदृश मुख, लाल-लाल ओठ, कुंदन के पुष्पों के समान मोती-सदृश दाँत, या हाथी-सदृश चाल देखे बिना मैं कैसे जीवित रहूँगा? और आपके अमृत-वर्षा करने वाले वचनों को सुने बिना मैं कैसे जीवित रहूँगा? | | | | "How can I live without seeing your lotus-like eyes, moon-like face, red lips, pearl-like teeth like gold flowers, or elephant-like gait? And how can I live without hearing your nectar-showering words? | | ✨ ai-generated | | |
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