श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 26: शुक्लाम्बर और विजय पर कृपा का वर्णन और भगवान की संन्यास की इच्छा  »  श्लोक 98
 
 
श्लोक  2.26.98 
আথে-ব্যথে ধাইযা প্রভুর ভক্ত-গণ
আনিলেন ধরিযা প্রভুরে তত-ক্ষণ
आथे-व्यथे धाइया प्रभुर भक्त-गण
आनिलेन धरिया प्रभुरे तत-क्षण
 
 
अनुवाद
भक्तगण शीघ्रता से भगवान के पीछे दौड़े और उन्हें पकड़कर वापस ले आये।
 
The devotees quickly ran after the Lord, caught him and brought him back.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)