श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 26: शुक्लाम्बर और विजय पर कृपा का वर्णन और भगवान की संन्यास की इच्छा  »  श्लोक 84
 
 
श्लोक  2.26.84 
ভাবাবেশে প্রভুর দেখিযা বিহ্বলতা
রোদন করেন গৃহে শচী জগন্-মাতা
भावावेशे प्रभुर देखिया विह्वलता
रोदन करेन गृहे शची जगन्-माता
 
 
अनुवाद
भगवान को आनंद में लीन देखकर, जगत की माता शची घर के अन्दर रो पड़ीं।
 
Seeing the Lord immersed in bliss, Sachi, the mother of the universe, wept inside the house.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)