श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 26: शुक्लाम्बर और विजय पर कृपा का वर्णन और भगवान की संन्यास की इच्छा  »  श्लोक 83
 
 
श्लोक  2.26.83 
সেই সব ভাব প্রভু করিযা স্বীকার
কান্দেন সবার গলা ধরিযা অপার
सेइ सब भाव प्रभु करिया स्वीकार
कान्देन सबार गला धरिया अपार
 
 
अनुवाद
भगवान भी उन्हीं भावनाओं में लीन हो गए और उन्होंने सभी की गर्दन पकड़ ली तथा फूट-फूट कर रोने लगे।
 
God also became absorbed in the same emotions and he held everyone's neck and started crying bitterly.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)