श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 26: शुक्लाम्बर और विजय पर कृपा का वर्णन और भगवान की संन्यास की इच्छा  »  श्लोक 81
 
 
श्लोक  2.26.81 
আপনার রসে প্রভু আপনে বিহ্বল
আপনাঽ পাসরিঽ যেন করযে সকল
आपनार रसे प्रभु आपने विह्वल
आपनाऽ पासरिऽ येन करये सकल
 
 
अनुवाद
जब प्रभु स्वयं के प्रति प्रेम में अभिभूत हो गए, तो उन्होंने ऐसे बोला जैसे वे भूल गए हों कि वे कौन हैं।
 
When the Lord was overwhelmed with love for Himself, He spoke as if He had forgotten who He was.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)