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श्लोक 2.26.79  |
কখনো বা বিরাহ প্রকাশ হেন হয
অকথ্য অদ্ভুত প্রেম-সিন্ধু যেন বয |
कखनो वा विराह प्रकाश हेन हय
अकथ्य अद्भुत प्रेम-सिन्धु येन वय |
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| अनुवाद |
| कभी-कभी वे विरह की भावना को इस प्रकार प्रकट करते थे कि ऐसा प्रतीत होता था मानो उनसे प्रेम का एक अवर्णनीय, अद्भुत सागर प्रवाहित हो रहा हो। |
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| Sometimes he expressed the feeling of separation in such a way that it seemed as if an indescribable, wonderful ocean of love was flowing from him. |
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