श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 26: शुक्लाम्बर और विजय पर कृपा का वर्णन और भगवान की संन्यास की इच्छा  »  श्लोक 78
 
 
श्लोक  2.26.78 
যে ক্রীডা করেন প্রভু সেই মহাদ্ভুত
নানা ভাবে নৃত্য করে জগন্নাথ-সুত
ये क्रीडा करेन प्रभु सेइ महाद्भुत
नाना भावे नृत्य करे जगन्नाथ-सुत
 
 
अनुवाद
जगन्नाथ पुत्र मिश्र ने विभिन्न भावों में नृत्य किया तथा उन्होंने जो लीलाएं प्रदर्शित कीं, वे सभी अत्यंत अद्भुत थीं।
 
Jagannatha's son Mishra danced in various moods and the pastimes he performed were all very wonderful.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)