श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 26: शुक्लाम्बर और विजय पर कृपा का वर्णन और भगवान की संन्यास की इच्छा  »  श्लोक 67
 
 
श्लोक  2.26.67 
নিত্যানন্দ জানেন প্রভুর সমীহিত
ঘট ভরিঽ গঙ্গা-জল দেন সাবহিত
नित्यानन्द जानेन प्रभुर समीहित
घट भरिऽ गङ्गा-जल देन सावहित
 
 
अनुवाद
भगवान का इरादा जानकर, नित्यानंद ने उन्हें आदरपूर्वक गंगाजल से भरा एक बर्तन दिया।
 
Knowing the Lord's intention, Nityananda respectfully gave him a vessel filled with Ganga water.
तात्पर्य
श्री गौरसुन्दर के 'मद्य लाओ' कहकर पुकारने के वास्तविक अभिप्राय को समझकर, नित्यानंद प्रभु गंगा जल से भरा एक बर्तन लाते थे। गंगा जल अमृत के समान है, और यह भक्ति भावनाओं को उत्तेजित करता है।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)