श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 26: शुक्लाम्बर और विजय पर कृपा का वर्णन और भगवान की संन्यास की इच्छा  »  श्लोक 65
 
 
श्लोक  2.26.65 
এই সকল ভাব হৈঽ লুকায তখনে
সবে না ঘুচিল রাম-ভাব চির-দিনে
एइ सकल भाव हैऽ लुकाय तखने
सबे ना घुचिल राम-भाव चिर-दिने
 
 
अनुवाद
भगवान ने ये भावनाएँ प्रकट कीं और फिर उन्हें वापस ले लिया, लेकिन बलराम के रूप में उनकी भावना कई दिनों तक बनी रही।
 
The Lord expressed these feelings and then withdrew them, but His feelings as Balarama continued for many days.
तात्पर्य
महाप्रभु ने अवतारों के दस प्रकार के भाव दर्शाने के बाद उन्हें छुपा लिया। इनमें से उन्होंने अक्सर हलधर का भाव दिखाया।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)