भगवान का शरीर सदैव प्रेम की मधुरता में व्याकुल रहता था, क्योंकि वे मत्स्य, कूर्म, नरसिंह, वराह, वामन, रामचन्द्र, बुद्ध, कल्कि और नन्द महाराज के पुत्र कृष्ण के भावों को प्रकट करते थे।
The Lord's body was always agitated in the sweetness of love, as He manifested the emotions of Matsya, Kurma, Narasimha, Varaha, Vamana, Ramacandra, Buddha, Kalki and Krishna, the son of Nanda Maharaja.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥