श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 26: शुक्लाम्बर और विजय पर कृपा का वर्णन और भगवान की संन्यास की इच्छा  »  श्लोक 61
 
 
श्लोक  2.26.61 
এই মত প্রতি বৈষ্ণবের ঘরে ঘরে
প্রতি-দিন নিত্যানন্দ-সṁহতি বিহরে
एइ मत प्रति वैष्णवेर घरे घरे
प्रति-दिन नित्यानन्द-सꣳहति विहरे
 
 
अनुवाद
नित्यानंद के साथ भगवान प्रतिदिन सभी वैष्णवों के घरों में इस प्रकार की लीलाओं का आनंद लेते थे।
 
The Lord, accompanied by Nityananda, would daily enjoy such pastimes in the homes of all Vaishnavas.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)