श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 26: शुक्लाम्बर और विजय पर कृपा का वर्णन और भगवान की संन्यास की इच्छा  »  श्लोक 60
 
 
श्लोक  2.26.60 
হেন মতে নবদ্বীপে শ্রী-গৌরসুন্দর
সর্ব-বেদ-বন্দ্য লীলা করে নিরন্তর
हेन मते नवद्वीपे श्री-गौरसुन्दर
सर्व-वेद-वन्द्य लीला करे निरन्तर
 
 
अनुवाद
इस प्रकार श्री गौरसुन्दर ने नवद्वीप में निरन्तर लीलाएँ कीं, जिनकी महिमा समस्त वेदों द्वारा प्रशंसित है।
 
In this way, Sri Gaurasundara continuously performed pastimes in Navadvipa, whose glory is praised by all the Vedas.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)