श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 26: शुक्लाम्बर और विजय पर कृपा का वर्णन और भगवान की संन्यास की इच्छा  »  श्लोक 54
 
 
श्लोक  2.26.54 
উঠিযাও বিজয হৈলা জড-প্রায
সপ্ত দিন ভ্রমিলেন সর্ব নদীযায
उठियाओ विजय हैला जड-प्राय
सप्त दिन भ्रमिलेन सर्व नदीयाय
 
 
अनुवाद
विजया तो उठ गया, पर लगभग जड़वत ही रहा। सात दिनों तक वह इसी अवस्था में नादिया में घूमता रहा।
 
Vijaya got up, but remained almost motionless. He wandered around Nadia in this state for seven days.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)