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श्री चैतन्य भागवत
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खण्ड 2: मध्य-खण्ड
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अध्याय 26: शुक्लाम्बर और विजय पर कृपा का वर्णन और भगवान की संन्यास की इच्छा
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श्लोक 51
श्लोक
2.26.51
প্রভু বলে,—“জানিলাঙ গঙ্গার প্রভাব
বিজযের বিশেষে গঙ্গায অনুরাগ
प्रभु बले,—“जानिलाङ गङ्गार प्रभाव
विजयेर विशेषे गङ्गाय अनुराग
अनुवाद
भगवान ने आगे कहा, "मैं समझता हूं कि यह गंगा का प्रभाव है, क्योंकि विजया विशेष रूप से गंगा के प्रति समर्पित हैं।
The Lord continued, “I understand that this is the influence of Ganga, because Vijaya is especially devoted to Ganga.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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