श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 26: शुक्लाम्बर और विजय पर कृपा का वर्णन और भगवान की संन्यास की इच्छा  »  श्लोक 48
 
 
श्लोक  2.26.48 
কত-ক্ষণ উন্মাদ করিযা মহাশয
শেষে হৈলা পরানন্দ মূর্চ্ছিত তন্ময
कत-क्षण उन्माद करिया महाशय
शेषे हैला परानन्द मूर्च्छित तन्मय
 
 
अनुवाद
कुछ देर तक पागलों की तरह उछलने के बाद विजया आनंद में डूब गई और बेहोश हो गई।
 
After jumping like crazy for some time, Vijaya became immersed in joy and fainted.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)