श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 26: शुक्लाम्बर और विजय पर कृपा का वर्णन और भगवान की संन्यास की इच्छा  »  श्लोक 47
 
 
श्लोक  2.26.47 
বিজযের হুঙ্কারে জাগিলা ভক্ত-গণ
ধরেন বিজয তবু না যায ধরণ
विजयेर हुङ्कारे जागिला भक्त-गण
धरेन विजय तबु ना याय धरण
 
 
अनुवाद
विजया की तेज़ गर्जना से सभी भक्त जाग गए। उन्होंने विजया को रोकने की कोशिश की, लेकिन वे असफल रहे।
 
Vijaya's loud roar awakened all the devotees. They tried to stop Vijaya, but were unsuccessful.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)