श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 26: शुक्लाम्बर और विजय पर कृपा का वर्णन और भगवान की संन्यास की इच्छा  »  श्लोक 44
 
 
श्लोक  2.26.44 
বিজয উদ্যোগ মাত্র করিলাঢাকিতে
শ্রী-হস্ত দিলেন প্রভু তাঙ্হার মুখেতে
विजय उद्योग मात्र करिलाढाकिते
श्री-हस्त दिलेन प्रभु ताङ्हार मुखेते
 
 
अनुवाद
जब विजय चिल्लाने ही वाला था, भगवान ने तुरन्त अपना करकमल उसके मुंह पर रख दिया।
 
When Vijay was about to shout, God immediately placed his lotus hand on his mouth.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)