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श्री चैतन्य भागवत
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खण्ड 2: मध्य-खण्ड
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अध्याय 26: शुक्लाम्बर और विजय पर कृपा का वर्णन और भगवान की संन्यास की इच्छा
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श्लोक 41
श्लोक
2.26.41
হেম-স্তম্ভ-প্রায হস্ত দীর্ঘ সুবলন
পরিপূর্ণ দেখে তথি রত্ন-আভরণ
हेम-स्तम्भ-प्राय हस्त दीर्घ सुबलन
परिपूर्ण देखे तथि रत्न-आभरण
अनुवाद
उसने देखा कि भगवान का हाथ सोने के खंभे के समान लम्बा और शक्तिशाली था तथा रत्नजटित आभूषणों से सुसज्जित था।
He saw that the Lord's hand was as long and powerful as a golden pillar and was adorned with jeweled ornaments.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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