श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 26: शुक्लाम्बर और विजय पर कृपा का वर्णन और भगवान की संन्यास की इच्छा  »  श्लोक 39
 
 
श्लोक  2.26.39 
ঽআঙ্খরিযা-বিজযঽ করিযা সবে ঘোষেঽ
মর্ম নাহি জানে লোক ভক্তি-হীন দোষে
ऽआङ्खरिया-विजयऽ करिया सबे घोषेऽ
मर्म नाहि जाने लोक भक्ति-हीन दोषे
 
 
अनुवाद
लोग उन्हें अँखरिया विजय कहते थे, किन्तु भक्ति से रहित होने के कारण वे उनकी महिमा को नहीं जानते थे।
 
People called him Ankhariya Vijay, but being devoid of devotion, they did not know his glory.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)