vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री चैतन्य भागवत
»
खण्ड 2: मध्य-खण्ड
»
अध्याय 26: शुक्लाम्बर और विजय पर कृपा का वर्णन और भगवान की संन्यास की इच्छा
»
श्लोक 37
श्लोक
2.26.37
ঠাকুরের এক শিষ্য শ্রী-বিজয-দাস
সে মহাপুরুষে কিছু দেখিলা প্রকাশ
ठाकुरेर एक शिष्य श्री-विजय-दास
से महापुरुषे किछु देखिला प्रकाश
अनुवाद
भगवान के एक शिष्य थे, जिनका नाम श्री विजयदास था। उस महान आत्मा को दिव्य दर्शन प्राप्त हुआ।
The Lord had a disciple named Sri Vijayadasa. That great soul had a divine vision.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×