श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 26: शुक्लाम्बर और विजय पर कृपा का वर्णन और भगवान की संन्यास की इच्छा  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  2.26.3 
এই-মত মহাপ্রভু বলে বার বার
শুনিঽ শুক্লাম্বর কাকু করেন অপার
एइ-मत महाप्रभु बले बार बार
शुनिऽ शुक्लाम्बर काकु करेन अपार
 
 
अनुवाद
जब महाप्रभु ने इस प्रकार बार-बार अनुरोध किया, तो शुक्लम्बर ने भावुक होकर भगवान से विनती की।
 
When Mahaprabhu requested repeatedly in this manner, Shuklambar became emotional and pleaded with the Lord.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)