श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 26: शुक्लाम्बर और विजय पर कृपा का वर्णन और भगवान की संन्यास की इच्छा  »  श्लोक 29
 
 
श्लोक  2.26.29 
এই মত প্রভু পুনঃ পুনঃআস্বাদিযা
করিলেন ভোজন আনন্দ-যুক্ত হৈযা
एइ मत प्रभु पुनः पुनःआस्वादिया
करिलेन भोजन आनन्द-युक्त हैया
 
 
अनुवाद
इस प्रकार भगवान ने बार-बार पूर्ण संतुष्टि के साथ भोजन का आनन्द लिया।
 
Thus the Lord enjoyed the food again and again with complete satisfaction.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)