श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 26: शुक्लाम्बर और विजय पर कृपा का वर्णन और भगवान की संन्यास की इच्छा  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  2.26.27 
তুমি হেন জন সে আমার বন্ধু-কুল
তোমাঽ-সব লাগিঽ সে আমার আদি মূল”
तुमि हेन जन से आमार बन्धु-कुल
तोमाऽ-सब लागिऽ से आमार आदि मूल”
 
 
अनुवाद
“तुम निश्चय ही मेरे उन मित्रों में से एक हो जिनके लिए मैं अवतार लेता हूँ।”
 
"You're definitely one of my friends that I embody."
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)