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श्री चैतन्य भागवत
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खण्ड 2: मध्य-खण्ड
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अध्याय 26: शुक्लाम्बर और विजय पर कृपा का वर्णन और भगवान की संन्यास की इच्छा
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श्लोक 25
श्लोक
2.26.25
হেন প্রভু বলে,—“জন্ম যাবত্ আমার
এ-মত অন্নের স্বাদু নাহি পাই আর
हेन प्रभु बले,—“जन्म यावत् आमार
ए-मत अन्नेर स्वादु नाहि पाइ आर
अनुवाद
भगवान बोले, "जन्म से लेकर अब तक मैंने कभी भी ऐसा स्वादिष्ट चावल नहीं खाया है।"
The Lord said, "Since my birth till now I have never eaten such delicious rice."
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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