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श्री चैतन्य भागवत
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खण्ड 2: मध्य-खण्ड
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अध्याय 26: शुक्लाम्बर और विजय पर कृपा का वर्णन और भगवान की संन्यास की इच्छा
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श्लोक 19
श्लोक
2.26.19
তত-ক্ষণে সর্বামৃত হৈল সে অন্ন
স্নান করিঽ প্রভু আসিঽ হৈলা উপসন্ন
तत-क्षणे सर्वामृत हैल से अन्न
स्नान करिऽ प्रभु आसिऽ हैला उपसन्न
अनुवाद
वह चावल तुरन्त ही अमृत के समान हो गया। इतने में भगवान् स्नान करके वहाँ आ पहुँचे।
The rice instantly became like nectar. Just then, the Lord arrived after bathing.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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