श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 26: शुक्लाम्बर और विजय पर कृपा का वर्णन और भगवान की संन्यास की इच्छा  »  श्लोक 185
 
 
श्लोक  2.26.185 
ঽহরি হরিঽ বলিঽ কেহ কান্দে উচ্চৈঃস্বরে
ডুবিলেন ভক্ত-গণ দুঃখের সাগরে
ऽहरि हरिऽ बलिऽ केह कान्दे उच्चैःस्वरे
डुबिलेन भक्त-गण दुःखेर सागरे
 
 
अनुवाद
अन्य लोग जोर-जोर से चिल्लाते हुए कहते हैं, “हरि! हरि!” इस प्रकार भक्तगण दुःख के सागर में डूब जाते हैं।
 
Others shout loudly, "Hari! Hari!" Thus the devotees drown in the ocean of sorrow.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)