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श्री चैतन्य भागवत
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खण्ड 2: मध्य-खण्ड
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अध्याय 26: शुक्लाम्बर और विजय पर कृपा का वर्णन और भगवान की संन्यास की इच्छा
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श्लोक 177
श्लोक
2.26.177
তথাপি ও মাথা মুণ্ডাইলে স্বাস্থ্য পাও
যে তোমার ইচ্ছা তাই করিঽ চলিঽ যাও”
तथापि ओ माथा मुण्डाइले स्वास्थ्य पाओ
ये तोमार इच्छा ताइ करिऽ चलिऽ याओ”
अनुवाद
“फिर भी, यदि आप अपना सिर मुंडाकर प्रसन्न हैं, तो यदि आपकी यही इच्छा है तो चले जाइए।”
“Anyway, if you’re happy to shave your head, then go ahead if that’s your wish.”
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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