श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 26: शुक्लाम्बर और विजय पर कृपा का वर्णन और भगवान की संन्यास की इच्छा  »  श्लोक 172
 
 
श्लोक  2.26.172 
শিখা-সুত্র ঘুচাইলেই সে কৃষ্ণ পাই
গৃহস্থ তোমার মতে বৈষ্ণব কি নাই?
शिखा-सुत्र घुचाइलेइ से कृष्ण पाइ
गृहस्थ तोमार मते वैष्णव कि नाइ?
 
 
अनुवाद
"क्या आप यह कह रहे हैं कि गृहस्थ वैष्णव नहीं हो सकता और वह अपनी शिखा और ब्राह्मण धागा त्याग कर कृष्ण को प्राप्त कर सकता है?
 
“Are you saying that a householder cannot become a Vaishnava and attain Krishna by giving up his Shikha and Brahmin thread?
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)