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श्री चैतन्य भागवत
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खण्ड 2: मध्य-खण्ड
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अध्याय 26: शुक्लाम्बर और विजय पर कृपा का वर्णन और भगवान की संन्यास की इच्छा
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श्लोक 171
श्लोक
2.26.171
অন্তরে দুঃখিত হৈঽ বলে গদাধর
“যতেক অদ্ভুত প্রভু, তোমার উত্তর
अन्तरे दुःखित हैऽ बले गदाधर
“यतेक अद्भुत प्रभु, तोमार उत्तर
अनुवाद
गदाधर ने दुःखी होकर कहा, “हे प्रभु, आपका कथन बहुत ही उलझन भरा है।
Gadadhara said sadly, “O Lord, your statement is very confusing.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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