श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 26: शुक्लाम्बर और विजय पर कृपा का वर्णन और भगवान की संन्यास की इच्छा  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  2.26.17 
“জয কৃষ্ণ গোবিন্দ গোপাল বনমালী”
বলিতে লাগিলাশুক্লাম্বর কুতূহলী
“जय कृष्ण गोविन्द गोपाल वनमाली”
बलिते लागिलाशुक्लाम्बर कुतूहली
 
 
अनुवाद
फिर शुक्लम्बर ने खुशी से गाना शुरू किया, "जय कृष्ण, गोविंदा, गोपाल, वनमाली!"
 
Then Shuklamber started singing happily, "Jai Krishna, Govinda, Gopal, Vanmali!"
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)