श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 26: शुक्लाम्बर और विजय पर कृपा का वर्णन और भगवान की संन्यास की इच्छा  »  श्लोक 169
 
 
श्लोक  2.26.169 
শিখা-সূত্র সর্বথায আমি না রাখিব
মাথা মুডাইযা যে-তে দিকে চলিঽ যাব”
शिखा-सूत्र सर्वथाय आमि ना राखिब
माथा मुडाइया ये-ते दिके चलिऽ याब”
 
 
अनुवाद
"मैं अपनी शिखा और ब्राह्मण जनेऊ अवश्य त्याग दूँगा। अपना सिर मुंडवाकर, जहाँ चाहूँ वहाँ जाऊँगा।"
 
"I will certainly give up my Shikha and Brahmin sacred thread. After shaving my head, I will go wherever I want."
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)