श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 26: शुक्लाम्बर और विजय पर कृपा का वर्णन और भगवान की संन्यास की इच्छा  »  श्लोक 159
 
 
श्लोक  2.26.159 
ঽবোল বোলঽ হুঙ্কার করযে দ্বিজমণি
পুণ্যবন্ত মুকুন্দের শুনিঽ দিব্য-ধ্বনি
ऽबोल बोलऽ हुङ्कार करये द्विजमणि
पुण्यवन्त मुकुन्देर शुनिऽ दिव्य-ध्वनि
 
 
अनुवाद
भाग्यशाली मुकुन्द का मधुर गायन सुनकर ब्राह्मणों के शिरोमणि ने जोर से गर्जना की, “जप करो! जप करो!”
 
Hearing the sweet singing of the fortunate Mukunda, the chief of the Brahmins roared loudly, "Chant! Chant!"
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)