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श्री चैतन्य भागवत
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खण्ड 2: मध्य-खण्ड
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अध्याय 26: शुक्लाम्बर और विजय पर कृपा का वर्णन और भगवान की संन्यास की इच्छा
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श्लोक 158
श्लोक
2.26.158
প্রভু বলে,—“গাও কিছু কৃষ্ণের মঙ্গল”
মুকুন্দ গাযেন, প্রভু শুনিযা বিহ্বল
प्रभु बले,—“गाओ किछु कृष्णेर मङ्गल”
मुकुन्द गायेन, प्रभु शुनिया विह्वल
अनुवाद
भगवान ने कहा, "कृष्ण की शुभ महिमा का गान करो।" जैसे ही मुकुन्द ने गान किया, भगवान अभिभूत हो गये।
The Lord said, "Sing the auspicious glories of Krishna." As Mukunda sang, the Lord was overwhelmed.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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