श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 26: शुक्लाम्बर और विजय पर कृपा का वर्णन और भगवान की संन्यास की इच्छा  »  श्लोक 156
 
 
श्लोक  2.26.156 
ভাবিযা আইর দুঃখ নিত্যানন্দ-রায
নিভৃতে বসিযা প্রভু কান্দযে সদায
भाविया आइर दुःख नित्यानन्द-राय
निभृते वसिया प्रभु कान्दये सदाय
 
 
अनुवाद
यह जानकर कि माता शची को कितना कष्ट होगा, भगवान नित्यानंद एकांत स्थान पर चले गए और लगातार रोते रहे।
 
Knowing how much pain Mother Shaci would feel, Lord Nityananda went to a secluded place and wept continuously.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)