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श्री चैतन्य भागवत
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खण्ड 2: मध्य-खण्ड
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अध्याय 26: शुक्लाम्बर और विजय पर कृपा का वर्णन और भगवान की संन्यास की इच्छा
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श्लोक 152
श्लोक
2.26.152
এই মত নিত্যানন্দ-সঙ্গে যুক্তি করিঽ
চলিলেন বৈষ্ণব-সমাজে গৌরাঙ্গ-শ্রী-হরি
एइ मत नित्यानन्द-सङ्गे युक्ति करिऽ
चलिलेन वैष्णव-समाजे गौराङ्ग-श्री-हरि
अनुवाद
इस प्रकार नित्यानंद से विचार-विमर्श करके भगवान गौरांग वैष्णवों की सभा में गए।
Thus, after discussing with Nityananda, Lord Gauranga went to the assembly of Vaishnavas.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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