श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 26: शुक्लाम्बर और विजय पर कृपा का वर्णन और भगवान की संन्यास की इच्छा  »  श्लोक 150
 
 
श्लोक  2.26.150 
তবে যে তোমার ইচ্ছা করিবে তাহারে
কে তোমার ইচ্ছা প্রভু, বিরোধিতে পারে”
तबे ये तोमार इच्छा करिबे ताहारे
के तोमार इच्छा प्रभु, विरोधिते पारे”
 
 
अनुवाद
“हे प्रभु, जो कुछ तेरी इच्छा हो, वही कर; क्योंकि तेरी इच्छा कौन बदल सकता है?”
 
“Lord, do whatever you wish, for who can change your will?”
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)