vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री चैतन्य भागवत
»
खण्ड 2: मध्य-खण्ड
»
अध्याय 26: शुक्लाम्बर और विजय पर कृपा का वर्णन और भगवान की संन्यास की इच्छा
»
श्लोक 150
श्लोक
2.26.150
তবে যে তোমার ইচ্ছা করিবে তাহারে
কে তোমার ইচ্ছা প্রভু, বিরোধিতে পারে”
तबे ये तोमार इच्छा करिबे ताहारे
के तोमार इच्छा प्रभु, विरोधिते पारे”
अनुवाद
“हे प्रभु, जो कुछ तेरी इच्छा हो, वही कर; क्योंकि तेरी इच्छा कौन बदल सकता है?”
“Lord, do whatever you wish, for who can change your will?”
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×