श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 26: शुक्लाम्बर और विजय पर कृपा का वर्णन और भगवान की संन्यास की इच्छा  »  श्लोक 141
 
 
श्लोक  2.26.141 
ইথে তুমি দুঃখ না ভাবিহ কোন ক্ষণ
তুমি তঽ জানহ অবতারের কারণ”
इथे तुमि दुःख ना भाविह कोन क्षण
तुमि तऽ जानह अवतारेर कारण”
 
 
अनुवाद
“एक क्षण के लिए भी दुःखी मत हो, क्योंकि तू मेरे अवतार का उद्देश्य जानता है।”
 
“Do not be sad even for a moment, because you know the purpose of my incarnation.”
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)