श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 26: शुक्लाम्बर और विजय पर कृपा का वर्णन और भगवान की संन्यास की इच्छा  »  श्लोक 140
 
 
श्लोक  2.26.140 
জগত্ উদ্ধার যদি চাহ করিবারে
ইহাতে নিষেধ নাহি করিবে আমারে
जगत् उद्धार यदि चाह करिबारे
इहाते निषेध नाहि करिबे आमारे
 
 
अनुवाद
“यदि आप संसार का उद्धार चाहते हैं, तो मुझे आशा है कि आप मुझे संन्यास लेने से नहीं रोकेंगे।
 
“If you want the salvation of the world, I hope you will not stop me from taking sanyas.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)