श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 26: शुक्लाम्बर और विजय पर कृपा का वर्णन और भगवान की संन्यास की इच्छा  »  श्लोक 132
 
 
श्लोक  2.26.132 
দেখ কালি শিখা-সূত্র সব মুডাই
যাভিক্ষা করিঽ বেডাইমু সন্ন্যাস করিযা
देख कालि शिखा-सूत्र सब मुडाइ
याभिक्षा करिऽ वेडाइमु सन्न्यास करिया
 
 
अनुवाद
"शीघ्र ही आप मुझे अपना सिर मुंडवाते और ब्राह्मणत्व त्यागते देखेंगे। मैं संन्यासी बनकर भिक्षा माँगता फिरूँगा।"
 
"Soon you will see me shaving my head and renouncing my Brahminhood. I will become a Sanyasi and go around begging."
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)