श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 26: शुक्लाम्बर और विजय पर कृपा का वर्णन और भगवान की संन्यास की इच्छा  »  श्लोक 130
 
 
श्लोक  2.26.130 
আমারে মারিতে যবে করিলেক মনে
তখনেই পডিঽ গেল অশেষ বন্ধনে
आमारे मारिते यबे करिलेक मने
तखनेइ पडिऽ गेल अशेष बन्धने
 
 
अनुवाद
“जैसे ही उन्होंने मुझे हराने का निर्णय लिया, वे तुरन्त ही असीमित बंधन में फंस गए।
 
“As soon as they decided to defeat me, they were instantly trapped in an infinite bind.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)