श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 26: शुक्लाम्बर और विजय पर कृपा का वर्णन और भगवान की संन्यास की इच्छा  »  श्लोक 127
 
 
श्लोक  2.26.127 
প্রভু বলে,—“শুন নিত্যানন্দ মহাশয!
তোমারে কহিযে নিজ হৃদয নিশ্চয
प्रभु बले,—“शुन नित्यानन्द महाशय!
तोमारे कहिये निज हृदय निश्चय
 
 
अनुवाद
भगवान ने कहा, "सुनो, नित्यानंद प्रभु! मैं अपना हृदय गुप्त रूप से तुम्हारे समक्ष प्रकट कर दूँ।"
 
The Lord said, "Listen, Nityananda Prabhu! Let me reveal my heart to you secretly."
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)