श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 26: शुक्लाम्बर और विजय पर कृपा का वर्णन और भगवान की संन्यास की इच्छा  »  श्लोक 122
 
 
श्लोक  2.26.122 
বলিঽ অট্ট অট্ট হাসে সর্ব-লোকনাথ
কারণ না বুঝিঽ ভয জন্মিল সবাঽত
बलिऽ अट्ट अट्ट हासे सर्व-लोकनाथ
कारण ना बुझिऽ भय जन्मिल सबाऽत
 
 
अनुवाद
यह कहकर भगवान जोर से हंस पड़े। भक्त समझ नहीं पाए कि वे क्यों हंस रहे हैं और चिंतित हो गए।
 
Having said this, the Lord burst out laughing. The devotees were unable to understand why he was laughing and became worried.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)