श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 26: शुक्लाम्बर और विजय पर कृपा का वर्णन और भगवान की संन्यास की इच्छा  »  श्लोक 104
 
 
श्लोक  2.26.104 
তাহে আমি বলিলাঙ—ঽকি করঽ পণ্ডিত
কৃষ্ণ কৃষ্ণ বল—যেন শাস্ত্রের বিহিতঽ
ताहे आमि बलिलाङ—ऽकि करऽ पण्डित
कृष्ण कृष्ण बल—येन शास्त्रेर विहितऽ
 
 
अनुवाद
"तब मैंने उनसे पूछा, 'हे पंडित, आप क्या कर रहे हैं? शास्त्रों के अनुसार कृष्ण का नाम जपिए।"
 
"Then I asked him, 'O Pandit, what are you doing? Chant the name of Krishna according to the scriptures.'
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)