श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 26: शुक्लाम्बर और विजय पर कृपा का वर्णन और भगवान की संन्यास की इच्छा  »  श्लोक 102
 
 
श्लोक  2.26.102 
সবে বলে ঽবড সাধু নিমাঞি পণ্ডিতঽ
দেখিতে গেলাঙ আমি তাহার বাডীত
सबे बले ऽबड साधु निमाञि पण्डितऽ
देखिते गेलाङ आमि ताहार बाडीत
 
 
अनुवाद
“सब कहते हैं कि निमाई पंडित एक महान संत हैं, इसलिए मैं उनसे मिलने उनके घर गया।
 
“Everyone says that Nimai Pandit is a great saint, so I went to his house to meet him.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)