श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 26: शुक्लाम्बर और विजय पर कृपा का वर्णन और भगवान की संन्यास की इच्छा  »  श्लोक 101
 
 
श्लोक  2.26.101 
সম্ভ্রমে জিজ্ঞাসে সবে ভযেরে কারণ
“কি জিজ্ঞাস আজি ভাগ্যে রহিল জীবন
सम्भ्रमे जिज्ञासे सबे भयेरे कारण
“कि जिज्ञास आजि भाग्ये रहिल जीवन
 
 
अनुवाद
सबने उत्सुकता से उससे पूछा कि वह क्यों डरा हुआ है, तो उसने जवाब दिया, "मत पूछो। आज मैं खुशकिस्मत हूँ कि ज़िंदा हूँ।"
 
Everyone curiously asked him why he was scared, to which he replied, "Don't ask. Today I am lucky to be alive."
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)