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श्री चैतन्य भागवत
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खण्ड 2: मध्य-खण्ड
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अध्याय 26: शुक्लाम्बर और विजय पर कृपा का वर्णन और भगवान की संन्यास की इच्छा
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श्लोक 100
श्लोक
2.26.100
সত্বরে চলিলা যথা পডুযার গণ
সর্ব-অঙ্গে ঘর্ম, শ্বাস বহে ঘনে ঘন
सत्वरे चलिला यथा पडुयार गण
सर्व-अङ्गे घर्म, श्वास वहे घने घन
अनुवाद
भारी साँस लेते हुए और पसीने से लथपथ वह छात्र जल्दी से अपने साथी छात्रों के साथ जा मिला।
Breathing heavily and covered in sweat, the student quickly joined his fellow students.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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