श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 25: श्रीवास के मृत पुत्र के द्वारा आध्यात्मिक ज्ञान का प्रवचन  »  श्लोक 87
 
 
श्लोक  2.25.87 
স্নান করিঽ বসে প্রভু শ্রী-বিষ্ণু পূজিতে
প্রেম-জলে সকল শ্রী-অঙ্গ-বস্ত্র তিতে
स्नान करिऽ वसे प्रभु श्री-विष्णु पूजिते
प्रेम-जले सकल श्री-अङ्ग-वस्त्र तिते
 
 
अनुवाद
जब वे स्नान करके भगवान विष्णु की पूजा करने बैठे, तो उनके वस्त्र और सम्पूर्ण शरीर प्रेमाश्रुओं से भीग गये।
 
When he took bath and sat down to worship Lord Vishnu, his clothes and entire body became drenched with tears of love.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)