श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 25: श्रीवास के मृत पुत्र के द्वारा आध्यात्मिक ज्ञान का प्रवचन  »  श्लोक 85
 
 
श्लोक  2.25.85 
হেন মতে নবদ্বীপে শ্রী-গৌর-সুন্দর
বিহরযে সঙ্কীর্তন-সুখে নিরন্তর
हेन मते नवद्वीपे श्री-गौर-सुन्दर
विहरये सङ्कीर्तन-सुखे निरन्तर
 
 
अनुवाद
इस प्रकार श्री गौरसुन्दर ने नवद्वीप में निरन्तर संकीर्तन का सुख भोगा।
 
In this way, Sri Gaurasundara enjoyed the joy of continuous Sankirtan in Navadvipa.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)