vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री चैतन्य भागवत
»
खण्ड 2: मध्य-खण्ड
»
अध्याय 25: श्रीवास के मृत पुत्र के द्वारा आध्यात्मिक ज्ञान का प्रवचन
»
श्लोक 85
श्लोक
2.25.85
হেন মতে নবদ্বীপে শ্রী-গৌর-সুন্দর
বিহরযে সঙ্কীর্তন-সুখে নিরন্তর
हेन मते नवद्वीपे श्री-गौर-सुन्दर
विहरये सङ्कीर्तन-सुखे निरन्तर
अनुवाद
इस प्रकार श्री गौरसुन्दर ने नवद्वीप में निरन्तर संकीर्तन का सुख भोगा।
In this way, Sri Gaurasundara enjoyed the joy of continuous Sankirtan in Navadvipa.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×