श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 25: श्रीवास के मृत पुत्र के द्वारा आध्यात्मिक ज्ञान का प्रवचन  »  श्लोक 82
 
 
श्लोक  2.25.82 
শ্রীবাসের চরণে রহুক নমস্কার
ঽগৌরচন্দ্রঽ ঽনিত্যানন্দঽ—নন্দন যাঙ্হার
श्रीवासेर चरणे रहुक नमस्कार
ऽगौरचन्द्रऽ ऽनित्यानन्दऽ—नन्दन याङ्हार
 
 
अनुवाद
मैं श्रीवास के चरणों में प्रणाम करता हूँ, जिनके पुत्र गौरचन्द्र और नित्यानन्द थे।
 
I bow at the feet of Srivasa, whose sons were Gaurachandra and Nityananda.
तात्पर्य
श्री गौर और नित्यानंद ने श्रीवास की सेवा को अपने पुत्र के समान स्वीकार किया।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)