এ সব সṁসার-দুঃখ তোমার কি দায
যে তোমারে দেখে সেহ কভু নাহি পায
আমি, নিত্যানন্দ—দুই নন্দন তোমার
চিত্তে তুমি ব্যথা কিছু না ভাবিহ আর”
ए सब सꣳसार-दुःख तोमार कि दाय
ये तोमारे देखे सेह कभु नाहि पाय
आमि, नित्यानन्द—दुइ नन्दन तोमार
चित्ते तुमि व्यथा किछु ना भाविह आर”
अनुवाद
"भौतिक जगत के दुःख आपको प्रभावित नहीं करते। यहाँ तक कि जो आपको देखता है, उस पर भी ऐसे दुःखों का प्रभाव नहीं पड़ता। नित्यानंद और मैं आपके दो पुत्र हैं, इसलिए अब आपको अपने हृदय में कोई शोक नहीं होना चाहिए।"
"The sorrows of the material world do not affect you. Even those who see you are not affected by such sorrows. Nityananda and I are your two sons, so you should no longer have any sorrow in your heart."
तात्पर्य
श्री गौर सुंदर ने श्रीवास पंडित से कहा, "भगवान के भक्तों का भौतिक संसार से कोई संबंध नहीं होता।" अज्ञानी लोगों की दृष्टि में, श्रीवास पंडित एक गृहस्थ और भौतिकवादी थे, लेकिन भगवान के भक्त सोच भी नहीं सकते कि श्रीवास पंडित ऐसे अशुभ व्यक्ति थे। जो लोग भगवान के भक्तों को देखने के आदी हैं, उनके लिए भौतिक अस्तित्व से कोई लगाव नहीं होता। यदि कोई भगवान को अपने जीवनसाथी, पति, पत्नी या पुत्र के रूप में स्वीकार करता है, तो वह उस शाश्वत व्यक्तित्व के साथ सीधा जुड़ाव प्राप्त करता है। भगवान के सभी वस्तुओं के साथ संबंध को देखने से जीव सशर्त स्थिति से मुक्त हो जाता है।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥